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Monday, February 19, 2024


tranceformer tpv turn calculation 

हेलो दोस्तों आज की विडिओ में हम ट्रांसफॉर्मर के टर्न कैलकुलेशन के बारे में जानेंगे 
अगर अआप भी  कोई ट्रांसफॉर्मर डिजाइन करना चाहते है और आपको ट्रांसफॉर्मर का डाटा कैसे निकालते है अगर नहीं पता तो  इस ब्लॉग को पूरा पढ़े इससे आपको पता चलेगा किसी ट्रांसफॉर्मर  का टर्न ,वोल्टेज इतयादि के  पता चलेगा।
 अगर आपके पास किसी भी नम्बर का कोर हो और आप उसका ट्रांसफॉर्मर डिजाइन करना चाहते है तो सबसे पहले आप एक कोर  लेंगे और उसका मेजरमेंट करेंगे सबसे पहले आपको  कोर का एरिया नकालना होगा उसके बाद फॉर्मूले से TPV मतलब TURN PER VOLT निकलना होगा उसके बाद आप ट्रांसफॉर्मर की बाइंडिंग कर जायेंगे। 

tranceformer ka  core area  निकलना           
ट्रांसफॉर्मर का कोर एरिया निकालने के लिए सबसे पहले आपको एक स्केल से ट्रांसफॉर्मर के बिच के भाग की चौड़ाई मेजर करेंगे और हमें जीतनी मोटी ट्रांसफॉर्मर बनानी है उसको मेजर करेंगे और आपस में दोनों का गुना कर दंगे जो भी गुरनफल आएगा वही ट्रांसफॉर्मर का कोर एरिया होगा।  
उदहारण के लिए एक कोर के बिच का भाग 2  इंच है और 2 इंच ही ट्रांसफॉर्मर की मोटाई रखनी है तब दोनों का गुना करने पर कोर एरिया 4 आता है।  
ट्रांसफॉर्मर की tpv turn  par voltege निकलना
ट्रांसफॉर्मर में  कितने टर्न लगाने से कितने वोल्टेज बनेंगे या ड्राप होंगे इसे ही turn per volt  कहते है 
इसको निकलने के लिए एक फार्मूला होता है जिसके जरिये इसका कैलकुलेशन किया जा सकता है
 
tpv =7.5/CORE AREA 
7.5 फॉर्मूले में ही है अगर कोर ज्यादा पुरानी है या कोर अच्छी नहीं है तो 7.5 के जगह आप 8 स्तेमाल करेंगे।  कोर एरिया और 7.5 को  भाग कर देने से हमें TPV  प्राप्त हो जाता है अब हमें जीतनी वोल्ट की ट्रांसफॉर्मर में बाइंडिंग करनी है हम गुना करके निकाल सकते है 


Saturday, December 3, 2022

BASIC PAINAL BOOST VOLTEGE NAME AND VELUE






VCC, VIN, VAA-     3.3V, 5V  12V
VGH, VGON, VON, VDDG-   20V to 32V
VGL, VGOFF, VOFF-   -5V TO -7V 
V COM-        5V TO 7V
AVDD, VDDA, V SOURCE-  12V TO 18V
HAVDD, HVDD-   6V TO 9V
DVDD, VDD, V LOGIC-   3.3V
GAMA OUTPUT-  1V TO 14V
VOLTEGE REFRENCE-   12V+





              












Friday, May 6, 2022

SMPS

 SMPS -  SWITCH  MODE  POWER   SUPPLY 
हेलो दोस्तों आज हम जानेंगे SMPS   के बारे में SMPS  एक तरह का पावर सप्लाई ही होता है   जिसको इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट के मदद से बनाई जाती है।   इसमें ac  करेंट को दिया जाता है और एक करन्ट को  स्टेप डाउन करके dc  करंट में बदला जाता है।  इसमें इनपुट में  एक वोल्टेज दिया जाता है और आउटपुट में dc  करेंट निकालता है।  इसमें इनपुट में सबसे पहले ac  करेंट को  शुद्ध  करने के लिए फ़िल्टर  non polorise capacitor का प्रयोग   करते है इसके तुरंत बाद एक फिल्ट्रेशन के लिए एक inducter  coil  का प्रयोग किया जाता है।  इसके तुरंत बाद चार डायोड के मदद से रेक्टिफायर  सर्किट बनाई जाती है और यहाँ पर एक  450  v  का फ़िल्टर  कपैसिटर प्रयोग किया जाता है जो rectifire  से निकलने वाले dc  करेंट को फ़िल्टर करने का कार्य किया जाता है   इसके तुरंत बाद एक स्विचिंग डिवाइस के के मदद से उच्च  फ्रीक्वेंसी पर ट्रांसफॉर्मर के प्राइमरी   COIL पर  स्विचिंग की  जाती है जिसके कारण से सेकेंडरी COIL  में वोल्टेज जनरेट होते है स्विचिंग  डिवाइस को कण्ट्रोल करने के लिए  
ऑप्टोकोपलोर और ड्राइवर IC   प्रयोग काप्रयोग किया जाता है जिसके कारण हमारा आउटपुट वोल्टेज कण्ट्रोल हो पता है।  
ट्रांसफॉर्मर के सेकेंडरी पर जो वोल्टेज प्राप्त होते है उनको डायोड के मदद से DC  से AC  में बदला जाता है इसके बाद COIL  और फ़िल्टर CAPACITER  के मदद से करंट को साफ़ किया जाता है  इसके बाद ही इसको इस्तेमाल किया जाता है। इसमें एक इंडिकेटर भी लगाई जाती है जिससे हमें पता चलता है की हमारा SMPS  सही तरह से कार्य कर रहा है 
 

                                                                             SMPS 
 

Saturday, February 5, 2022

888 modoul installation 888 str पाच तार वाले माडुल को कैसे लगाये?

888  modoul installation
 888 str पाच तार  वाले  माडुल को  कैसे लगाये?

हेलो दोस्तों आज हम जानेंगे 888 STR modoul के बारे में ।
यह एक smps powersupplyपावरसप्लाइ मॉडुल है जिसको किसी भी पावर सप्लाई में प्रयोग किया जा सकता है यह बहुत छोटा होता है जिसके कारण इसे कही भी लगाया जा सकता है । ज्यादातर इसको  LCD,LED टीवी या छोटे power supply में प्रयोग किया जाता है  इसमें एक str लगा होता है साथ ही इसमें ड्राइवर सेक्शन(driver section )भी होता है जिसके इसको प्रयोग करना भी काफी आसान होता है इसे यूनिवर्सल मॉडुल  (universal modul ) भी कहते है इसमें कुल 5 अलग अलग तारे होती है जैसे 
(1) पीला yellow  
(2) काला black
(3) लाल Red 
(4) सफ़ेद white 
(5) हरा Green 

(1) पीला तार = इस modul में पीला तार  को जहा dc 300V  ट्रांसफॉर्मर में से होकर मॉस्फेट  या transister पर जाती है वह हम पिले वाले तार को कनेक्ट करते  है ।
(2) काला तार = कला तार हमारे power supply  के मेन फ़िल्टर कपैसिटर के negative (-) पर कनेक्ट करते है। 
(3) लाल तार=  इस तार को  ट्रांसफॉर्मर के ऑक्सीलेटर वाली coil से जो डायोड लगा होता है उसके (+) वाले हिस्से पर लगाया जाता है । और  इसका दूसरा हिस्सा ground से जुड़ा होता है । इस तार के द्वारा modul में लगे STR को खुराक VCC  लगभग 15 वोल्ट  दी जाती है 
(4) सफ़ेद तार= इस तार को optocuplor  के पिन नंबर 4 पर कनेक्ट करते है और तीन नंबर को ग्राउंड ground से कनेक्ट करते है ।
(5) हरा तार= हरे तार को मेन फ़िल्टर कपैसिटर के (+) पर लगाते है ।

yellow =(tranceformer के 300V वाले टर्मिनल पर जो मॉस्फेट या ट्रांसिस्टर पर जाती है )
black =ground(-)
Red= डायोड (+)
white= optocuplor pin no. (4)
Green= filter capacitor (+)

नोट - अगर सर्किट में ख़राब  या सही mosfet या transister या कोई ड्राइवर IC लगी है तो सबसे पहले इन्हे सर्किट से निकाल दे और मेन कपैसिटर को डिस्चार्ज करने के बाद ही modul को curkit में लगाए  नहीं तो हो सकता है modoul काम न करे ।

Monday, January 17, 2022

साफ्ट स्टार्टिंग सर्कीट(Shoft start curkit)

साफ्ट स्टार्टिंग सर्कीट(Shoft start curkit)
हेलो  दोस्तों , 
आज हम जानेंगे सॉफ्ट स्टार्टिंग सर्किट के बारे में shoft start क्या होता है आज हम  सधारण भाषा में समझेंगे ।
शॉप्ट स्टार्ट सर्किट का उपयोग ऐसे स्थानों पर किया जाता है जहा मशीने स्टार होते समय ज्यादा करंट लेती है 
जैसे  इसका उपयोग smps पावर सप्लाई या crt टीवी ,एम्प्लीफायर इत्यादि में इसका प्रयोग किया जाता है क्योकि इन उपकरणों में लगा capacitor जब पहली बार चार्ज  होता है तो curkit से ज्यादा करंट लेता है जो हमारे लिए सही नहीं है क्योकि ज्यादा करंट लेने के कारण हमारे सिस्टम का फ्यूज जल सकता है ।
इसलिए सॉफ्ट स्टार्ट सर्किट का प्रयोग इन उपकरणों में किया जाता है इनके कारण हमारे सर्किट को वोल्टेज  का  झटका नहीं लगता यह धीरे धीरे हमारे किसी भी सिस्टम को स्टार्ट करता है । जिसके कारण हमारा सिस्टम भी सुरच्छित रहता है । इसको ntc /ptc और कही कही रीले realay का प्रयोग किया जाता है
इसको AC मेन पर लगाया जाता है मतलब इसको फ्युज या मेन स्वीच  के बाद AC सेक्सन मे प्रयोग कीया जाता है।

Saturday, January 15, 2022

LCD/ led मे नया बोर्ड लगाते समय आने वाली समस्याये

LCD/ led मे नया बोर्ड लगाते समय आने वाली समस्याये

LCD/ led मे नया बोर्ड लगाते समय आने वाली समस्यायेlcd या led टीवी में नई बोर्ड लगते समय ज्यादा देखी जाने वाली समस्याए -
1.  मैपिंग प्रॉब्लम 
2.  पिक्चर उलटी आना 
3.  पिक्चर आधी आना 
4.  कलर में बार बार परिवर्तन होना(पैनल लाल , सफ़ेद ,हरा ,नीला होते रहना )
5. रिमोट का न काम करना या remote का कोई कोई बटन का न कार्य करना 
ये मुख्य समस्याएं है जो नए यूनिवर्सल बोर्ड लगते समय आ सकते है । हम बारी बारी से इस समस्याओ के ऊपर चरचा करेंगे ।
1. मैपिंग प्रॉब्लम - नया प्लेट लगते समय कभी कभी  मैपिंग की समस्या  आ ही जाती है  इससे पिक्चर साफ़ नहीं दिखाई देती है पिक्चर के रंग फ़टे फ़टे  से लगते है 
इस समस्या के लिए हमें सबसे पहले रिमोट से input 2580 दबाना होता है इस कोड को दबाते ही सर्विस मोड खुल कर स्क्रीन पर आ जाता है  इसके बाद हमें painal  argest  पर दबाना होता है इसके बाद lvds  mapping  या मैप के opson  पर जाना   होता है 
ईसको पहचानना बहुत आसान होता है इसके आगे बिट में कोई मान लिखा होता है  वही mapping  का opson होता है यहाँ आने के बाद इसके मान को कम ज्यादा करना है 
जैसे ही विडिओ सही आने लगती है वैसे ही वह से exit हो जाना है आपकी mapping की समस्या सही हो जाएगी ।
2. पिक्चर उलटी आना 
 यह भी कभी कभी देखने को मिलता है पिक्चर उलटी दिखाई देती है इस समस्या को सही करने के लिए सबसे पहले हम input 2580 से सर्विस मोड को ओपन करेंगे  इसके बाद painal argest पर जाएंगे इसके बाद miror पर जाकर उसे ऑन करेंगे  ऑन करने के बाद आपका पिक्चर सीधा हो जायेगा  इसके बाद यहाँ से exit हो जाना है आपका प्रॉब्लम 
सही हो जाएगी ।
3. led टीवी में पिक्चर आधे पैनल पर ही आ रही है बाकी डिस्प्ले काला है 
ऐसी समस्या तब आती है जब पैनल का रेजुलेशन बोर्ड के shoftwere से  मैच नहीं होती 
इसको सही करने के लिए सबसे पहले हमें input 31181 दबाना है इसके बाद आपका सेट ऑफ़ होकर दुबारा चालू होगा और आपके  पैनल और सॉफ्टवेर मैच हो जाती है और अब पिक्चर पुरे स्कीन पर सही से आती है

4.  कलर में बार बार परिवर्तन होना(पैनल लाल , सफ़ेद ,हरा ,नीला होते रहना )
ऐसे बर्निंग समस्या भी कहते है  यह समस्या तब आती है जब हमारे पैनल के lvds केबल पैनल से मैच नहीं होती या पैनल का रेजुलेशन मैच न हो तो भी यह प्रॉब्लम आती है 
कई बार ऐसा भी होता है की हम सेटिंग में जाकर हम गलती से बर्निंग मोड को ऑन कर देते है तब भी ऐसी समस्या आती है इसको सही करना आसान होता है हमें टीवी के पीछे वाले power बटन को 10 सेकेंड तक दबाये रखना है इसके बाद आपका सेट कुछ समय के बाद फिर से स्टार्ट होगा अब आप देखेंगे की आपका सेट सही हो चूका है यह तरीका तभी काम करेगा जब दिक्कत सेटिंग से हो अन्यथा कोई परिवर्तन नहीं होगा ।
अगर नया बोर्ड लगते समय यह समस्या आती है तो इसका मतलब यह है की आपके पैनल का रेजुलेशन आपके बोर्ड से मैच नहीं कर रहा है  इसको सही करने के लिए सबसे पहले रिमोट में input 31181 दबाना है आपका सेट ऑफ़ होकर दुबारा आन होगा और आपकी  बर्निंग की समस्या सही हो जाएगी ऐसा करने से कुछ समस्या और भी आ सकती है जैसे मैपिंग की समस्या ,पिक्चर का उल्टा आना  इस तरह के समस्याओ को आप सर्विस मोड से सही कर सकते है ।

5. रिमोट का कार्य न करना 
नया बोर्ड led टीवी में लगते समय कभी कभी ऐसा भी होता है की बोर्ड लगाने के बाद रिमोट काम नहीं कर रहा है इस समस्या को सही करने के लिए सबसे पहले रिमोट के set बटन को दबाये रखना है इस बटन को तबतक दबाये रखना है जबतक डिस्प्ले पर वॉल्यूम valum का opson न आ जैसे वाल्यूम का  opson आने के बाद आपको इस बटन को छोड़ देना है  अगर कोई अन्य opson आये तो भी बटन को दबाये रखना है इसके बाद आपका रिमोट काम करने लगेगा ।


Tuesday, January 11, 2022

LCD मे विडीयो उल्टी आ रही है

  ।ed  टीवी में विडिओ उलटी चल रही है 
इसको सही करने के लिए सबसे पहले हम सर्विस मोड(input 2580) को चालू करेंगे और पैनल अर्जेस्ट पर सलेक्ट करके मिरर सेटिंग को चालू करेंगे । विडिओ सीधी हो जाएगी.

मैपिंग प्राबलम क्या है?LCD TV मे मैपिंग को कैसे सही करे

led टीवी में lvds  मैपिंग प्रॉब्लम को solve करे 

कई बार ऐसा होता है की हमारी विडिओ बहुत बेकार आती है कलर साफ़ नहीं दिखाई नहीं देते है ऐसे lvds मैपिंग कहते है 
इसको सही करने के लिए सबसे पहले हम सर्विस मोड को चालू ( input 2580 )करेंगे उसके बाद हम पैनल अर्जेस्ट को दबाएंगे उसके बाद मैपिंग पर जायेंगे और मैपिंग के बढ़ाना है इसके आगे बिट लिखा होता है इसके कारण आप इस opson को  विडिओ सही पहचानने मे कोइ परेसानी नही होगी ।इसके मान को 8 बिट या जितने बिट पर पिक्चर क्लियर हो जाये   इसके बाद यहा  से exit हो जाना है।

led का रेजुलेशन कैसै सेट करे

lcd या led टीवी  मे resulation कैसे सेट करे 

सबसे पहले हम input 31181 रीमोट में दबाएंगे उसके बाद आपका सेट ऑफ़ होगा और उसके बाद फिर से  on होगा और आपके टीवी का resulation  सही हो जायेगा ।

ओपन सर्विस मोड - input 2580
रेसुलेशन सेट -  input 31181
अलग अलग कम्पनी के लिये अलग अलग कोड हो सकता है ।पहले कोड को पता कर ले।

Sunday, January 2, 2022

जिन्नर डायोड (JINNER DAYOD)

जिन्नर डायोड (JINNER DAYOD)

जिनर डायोड एक प्रकार का डायोड ही  है यह दीखने मे मे एसा लगता है जैसे यह सिसे का बना हो। यह लाल रंग का होता है इसमे भी दो पार्ट होते है एनोड एव कैथोड।इसका  प्रयोग बहुत से स्थानो पर कीया जाता है इसका प्रयाेग  लगभग सभी सभी सर्किटो मे कीया जाता है  इसको अलग अलग कामो के लिये भी प्रयोग कीया जाता है।इसका प्रयोग मुख्य रुप से  वोल्टेज रेगुलेटर (voltege regulater)के रुप मे कीया जाता है।यह बोल्टेज को रेगुलेट करता है ।
जितने  वोल्ट का जिनर डायोड अगर सर्कीट मे उससे अधिक वोल्टेज आ जाता है तो यह उस वोल्टेज को रेगुलेट करता है ।अगर जिनर डायोड के वोल्टेज से बहुत ज्यादा वोल्टेज सर्कीट मे प्रवेश करता है तो  जिनर डायोड उस वोल्टेज को रेगुलेट नही कर पायेगा और यह सार्ट होकर सर्कीट को प्रोटेक्सन प्रदान करता है।जिससे आगे के  काम्पोनेन्ट खराब नही होते है ।यह वोल्टेज को  फीक्स करने का काम करता है मतलब जितने वोल्टेज काजिनर डायोड एक प्रकार का डायोड ही  है यह दीखने मे मे एसा लगता है जैसे यह सिसे का बना हो। यह लाल रंग का होता है इसमे भी दो पार्ट होते है एनोड एव कैथोड।इसका  प्रयोग बहुत से स्थानो पर कीया जाता है इसका प्रयाेग  लगभग सभी सभी सर्किटो मे कीया जाता है  इसको अलग अलग कामो के लिये भी प्रयोग कीया जाता है।इसका प्रयोग मुख्य रुप से  वोल्टेज रेगुलेटर (voltege regulater)के रुप मे कीया जाता है।यह बोल्टेज को रेगुलेट करता है ।
जितने  वोल्ट का जिनर डायोड अगर सर्कीट मे उससे अधिक वोल्टेज आ जाता है तो यह उस वोल्टेज को रेगुलेट करता है ।अगर जिनर डायोड के वोल्टेज से बहुत ज्यादा वोल्टेज सर्कीट मे प्रवेश करता है तो  जिनर डायोड उस वोल्टेज को रेगुलेट नही कर पायेगा और यह सार्ट होकर सर्कीट को प्रोटेक्सन प्रदान करता है।जिससे आगे के  काम्पोनेन्ट खराब नही होते है ।यह वोल्टेज   को रेगुलेट करने का कार्य करता है।  


Friday, December 31, 2021

what is inductor ? इंडक्टर क्या है?

what is inductor ? इंडक्टर  क्या है?


हेलो दोस्तों , 
आज हम जानेंगे  इंडक्टर inducture  क्या होता है ,
इंडक्टर एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स है  इसका प्रयोग इलेक्ट्रॉनिक्स में बहुत से स्थानों पर किया जाता है 
 इंडक्टर inducture  एक तार की कुंडली coil  हे होती है  इस coil  को फेराइड कोर पर लपेटा जाता है ।
इसका प्रयोग सर्किट में फिल्ट्रेसन filtreson , के कार्य के लिए किया जाता है । यह capacitor के सामान ही कार्य करता है लेकिन इसमें स्टोर हुई विद्युत्धारा उलटी दिशा में होती है इसका प्रयोग सर्किट में कर्रेंट को फ़िल्टर करने एव वोल्टेज बूस्टिंग इत्यादि के लिए इसे ज्यादातर प्रयोग  किया जाता है। यह ज्यादातर copper  ताम्बे धातु का बनाया जाता है ।

Wednesday, December 29, 2021

थर्मल पेस्ट क्या होता है?what is thurmal pext ,where use this componantsand why?

थर्मल पेस्ट क्या होता है?what is thurmal pext ,where use this componants and why?


अब हम जानेंगे थर्मल पेस्ट (thermal pext ) के बारे में ।थर्मल पेस्ट एक प्रकार का सफ़ेद पेस्ट होता है जिसको हम उस कॉम्पोनेन्ट पर प्रयोग करते है जिसमे हीट  उष्मा ज्यादा उत्पन्न होती है और  जहा पर हीटसिंक heatsink  का प्रयोग किया जाता है ।इस थर्मल पेस्ट को कॉम्पोनेन्ट एव हीटसिंक के बिच में प्रयोग किया जाता है जिसके कारण से दोने के बिच में कोई भी गैप स्थान नहीं होती है जिससे कूलिंग प्रॉपर हो  पाती है और कॉम्पोनेन्ट ज्यादा दिन तक चलता है यह थर्मल पेस्ट उष्मा का सुचालक होता है । इसका प्रयोग उन उपकरणों में किया जाता है जिसमे कूलिंग की जरुरत  होती है जैसे_ मॉस्फेट  , माइक्रोप्रोसेसर , माइक्रोकंट्रोलर , मॉस्फेट ,trandistar , डायोड्स , इत्यादि स्थानों पर इसका प्रयोग किया जाता है ।

हिटसिंक क्या है?what is heatsink

हिटसिंक क्या है?what is heatsink


आज हम हिटसिंक heatsink के बारे में जानेंगे । यह एल्युमिनियम या पीतल या किसी ठंढी धातु का बना होता है । इसका प्रयोग अनेको जगहों पर किया जाता है । यह हमारे  किसी किसी कम्पोनेंट्स के ऊपर या पीछे लगाया जाता है जिससे ये हमारे कम्पोनेंट्स को कूलिंग cooling प्रदान करता है जिससे हमारा कम्पोनेंट्स गर्म होकर ख़राब नहीं होता है । इसको माइक्रोप्रोसेसर ,मॉस्फेट, माइक्रोकंट्रोलर ,ट्रांजिस्टर ,डायोड ,ट्रेक , scr इत्यादि के साथ heatsink  हीटसिंक का प्रयोग किया जाता है । कॉम्पोनेन्ट को heatsing  के ऊपर  स्क्रू से टाइट कसते है या कुछ कम्पोनेंट्स में हीटसिंक को कम्पोनेंट्स के ऊपर  प्रयोग किया जाता है

Tuesday, December 28, 2021

PTC क्या होती है?what is PTC?

PTC क्या होती है?what is PTC?

अब हम PTC के बारे में जानेंगे ,
PTC  भी NTC के जैसे ही काम करती है।इसका पूरा नाम positive tempreture  cofficiant  पॉजिटिव टेम्प्रेचर कोफिसिएंट होता है यह भी NTC के जैसा ही होता है बस फर्क इतना होता है की NTC का तापमान बढ़ाने पर इसका प्रतिरोध घटता है लेकिन  PTC  में तापमान बढ़ाने पर इसका प्रतिरोध भी बढ़ाता है ।
आजकल NTC  का प्रयोग  ज्यादा किया जाता है , PTC  का प्रयोग बहुत कम स्थानों पर किया जाता है ।जैसे इसका प्रयोग CRT TV में डिगाजिंग कोइल dogazing coil  में पिक्चर ट्यूब को demagnetigh  करने के लिए प्रयोग किया जाता है ।जब TV चालू होती है तो पिक्टर ट्यूब को demagnetigh  करने के लिएइसका प्रयोग किया जाता है जब TV में सप्लाई इन होती है तो उस समय PTC  के टेम्प्रेचर  एव प्रतिरोध कम होता है लेकिन जब कुछ सेकेंड के बाद पिक्चर ट्यूब dimagnetigh हो जाता है फि यह गर्म होकर अपने प्रतिरोध को बढ़ा लेता है जिसके बाद coil  में सप्लाई जानी बंद हो जाती है पिक्टर ट्यूब को केवल एक ही बार demagnetigh  करना होता है ताकि पिक्चर ट्यूब के कलर न बिगड़े ।

NTC क्या होता है? what is NTC?

NTC क्या होता है? what is NTC?


हेलो दोस्तों ,
 आज हम NTC के बारे में जानेंगे 
NTC एक प्रकार का रजिस्टन्स ही होता है।इसका पूरा नाम (negative tumpretur  coficiant) नेगेटिव टम्परेचर कोफिसिएंट होता है। इसका प्रयोग ज्यादातर smps  में सीरीज में प्रयोग किया जाता है ।इसका रजिस्टन्स इसके तापमान पर निर्भर रहता है जैसे जैसे इसके तापमान बढ़ाता है वैसे ही इसके प्रतिरोध में परिवर्तन होती है 
इसको smps  पावर सप्लाई में ज्यादातर प्रयोग किया जाता है जब हम smps  को सप्लाई प्रदान करते है तो smps का मेन कैपेसिटर जब पहली बार  चार्ज होता है उस समय सर्किट में ज्यादा एम्पियर करेंट फ्लो होता है जिसके  कारण हमारा फ्यूज जल सकता है इसी कारण smps में NTC का प्रयोग किया जाता है ।इसका प्रतिरोध सुरु मे ज्यादा होता है लेकीन गर्म होने पर इसका प्रतिरोध कम हो जाता है। जब smps  में अचानक करंट देते है तो कपैसिटर चार्ज होते समय सर्किट से ज्यादा करंट लेता है  जब कपैसिटर चार्ज होता है तो उस केश में करंट ज्यादा लेने के कारण ntc  गरम हो जाता है जिसके कारण इसका प्रतिरोध घट जाता है जैसे जैसे कपैसिटर चार्ज हो जाता है वैसे से ntc  का तापमान सामान्य हो जाता है और इसका प्रतिरोध भी सामान्य हो जाता है । इसको प्रोटेक्शन के दृस्टि से प्रयोग किया जाता है ।यह काले रंग का वेरिस्टर के तरह ही होता है ।

Monday, December 27, 2021

SMDकाम्पोनेन्ट्स क्या होते है ?(SMD componants)

SMDकाम्पोनेन्ट्स क्या होते है ?(SMD componants)



smd componants 
हेलो दोस्तों , आज हम smd componants  के बारे में जानेंगे । इसका  पूरा नाम सरफेस माउंट डिवाइस serface mounted device होता है । ये कॉम्पोनेन्ट हमारे सामान्य कम्पोनेंट्स से अलग होते है । ये कम्पोनेंट्स हमारे सामान्य कॉम्पोनेन्ट की तुलना में काफी छोटे होते है लेकिन काम उतना ही करते है । ये कम्पोनेंट्स बहुत कम स्थान घेरते है जिससके कारण इससे बनाई गयी सर्किट सामान्य सर्किट से काफी छोटी हो जाती है हमारे हर कम्पोनेंट्स के smd  कॉम्पोनेन्ट होते है हम दोनो मे से कीसी से भी कोई भी सर्किट  बना सकते है बस साइज का फर्क देखने की मिलेगा दोनों सर्किट का कार्य सामन होगा ।
इसके निम्न कॉम्पोनेन्ट आते है जैसे _
smd डायोड 
smd  रजिस्टेन्स 
smd  कैपेसिटर 
smd zenor डायोड 
smd मॉस्फेट, ट्रांसिस्टर,coil रेगुलेटर इत्यादि smd वरजन  के कॉम्पोनेन्ट आते है आज कल लगभग सभी उपकरण smd निर्मित आ रहे है जैसे _    लेपटॉप डेस्कटॉप , इन्वर्टर  ,स्टेबलाइजर , बिल्डिंग मशीन इत्यादि की सर्किट smd  में आ रहे है। हम कह सकते है की आजकल का युग smd युग है । इन सर्कीट मे आगे और पीछे दोनो तरफ components काम्पोनेन्ट्स लगे होते है ।यह एक सामान्य सर्कीट है ,जो देखने मे काफी बडी लग रही है ।अगर हम इसी सर्कीट को smdमे बनाये तो यह सर्कीट बहुत छोटी हो जायेगी।इन सर्कीट को आसानी से रीपेयर कीया जा सकता है।यह एक smd सर्कीट है अगर हम इस स्कीट को सामान्य तरीके से बनाये तो यह सर्कीट बहुत बडी होगी।इन सर्कीट की रीपेयरींग थोडी जटील होती है।

जिनर डायोड क्या है?(zener daiod)

जिनर डायोड क्या है?(zener daiod)


जिनर डायोड एक प्रकार का डायोड ही  है यह दीखने मे मे एसा लगता है जैसे यह सिसे का बना हो। यह लाल रंग का होता है इसमे भी दो पार्ट होते है एनोड एव कैथोड।इसका  प्रयोग बहुत से स्थानो पर कीया जाता है इसका प्रयाेग  लगभग सभी सभी सर्किटो मे कीया जाता है  इसको अलग अलग कामो के लिये भी प्रयोग कीया जाता है।इसका प्रयोग मुख्य रुप से  वोल्टेज रेगुलेटर (voltege regulater)के रुप मे कीया जाता है।यह बोल्टेज को रेगुलेट करता है ।
जितने  वोल्ट का जिनर डायोड अगर सर्कीट मे उससे अधिक वोल्टेज आ जाता है तो यह उस वोल्टेज को रेगुलेट करता है ।अगर जिनर डायोड के वोल्टेज से बहुत ज्यादा वोल्टेज सर्कीट मे प्रवेश करता है तो  जिनर डायोड उस वोल्टेज को रेगुलेट नही कर पायेगा और यह सार्ट होकर सर्कीट को प्रोटेक्सन प्रदान करता है।जिससे आगे के  काम्पोनेन्ट खराब नही होते है ।यह वोल्टेज को फिक्स करने का कार्य करता है इसको ज्यादातर  सर्कीट के सप्लाई के पैरलल मे लगाया जाता है इसपर एक तरफ काली रेखा बनी होती है जो पाजिटीव हिस्सा होता है।यह मार्केट मे अलग अलग मान के आते है जैसे-1v,2v,2.2v,3v,4v,5v,5.5v,इसी प्रकार से अलग अलग मान के जिनर डायोड आते है जहा जिस जिनर का प्रयोग होता है उसे प्रयोग कर लिया जाता है।

Saturday, December 25, 2021

voltage booster curkit

VOLTEGE BOOSTER CURKIT वोल्टेज बूस्टर सर्किट 
आज हम वोल्टेज बूस्टर सर्किट के बारे में पढ़ेंगे। कई बार ऐसा होता है की किसी  इलेक्ट्रॉनिक मशीन को रन करने के लिए ज्यादा वोल्टेज की आवस्यकता होती है  लेकिन हमारे पास उतने वोल्टेज का ट्रांसफॉर्मर नहीं होता है ऐसे स्थान पर इस सर्किट का प्रयोग किया जा सकता है इसमें 2 इलेक्ट्रोलाइट कपैसिटर और 2 डायोड के मदद से हम इस सर्किट को बना सकते है सबसे पहले हाँ दोनों capacitar को सीरीज में कनेक्ट करते है ऐसी प्रकार डायोड को भी सीरीज में जोड़कर डायोड का + तथा - दोनों को कपैसिटर के पैरेलल में कनेक्ट करते है ।
अब हम ट्रांसफॉर्मर का सेकेंडरी को  दोनों कपैसिटर के बिच में और दोनों डायोड के बिच में कनेक्ट करेंगे ।
और आउटपुट डायोड के दोनों पॉइंटो से ले लेंगे । जितने वोल्ट का ट्रांसफॉर्मर होगा उसके दो गुना ज्यादा वोल्टेज मिलेगा और यह वोल्टेज दस वोल्टेज होगा । अब इसमें ध्यान देने वाली एक बात है इसमें कपैसिटर  आउटपुट वोल्टेज के अनुसार सलेक्ट करे,नहीं तो कपैसिटर ब्लॉस्ट हो जायेगा । इस सर्किट का आउटपुट वोल्टेज हम किसी भी dc  उपकरण में हम कर सकते है ।
अब हम सर्किट डाइग्राम के माध्यम से जानेंगे की इसको कैसे बनाना है ।इस सर्किट में हम 12 वोल्ट  का ट्रांसफॉर्मर ,5408 डायोड ,इलेक्ट्रोलाइट कपैसिटर 4700uf 45या 25 वाल्ट का प्रयोग कर रहे है ।
आप अपने वोल्टेज के अनुसार कम्पोनेंट्स को लगाए।
एक बात और यह सर्कीट केवल रेक्टीफायर के लिये है।

Friday, December 24, 2021

what is verister?(MOV)वैरिस्टर क्या है ?


voltage booster curkitवेरिस्टर (verister (MOV))  METOL OXIDE VERISTER
हेलो दोस्तों आज हम जानेंगे  वेरिस्टर verister  क्या होता है। 

वेरिस्टर सब्द को इलेक्ट्रॉनिक्स के variable और ragister  से लिया गया है वेरिस्टर (verister ) एक तरह का रजिस्टर ही होता है। जो  परिवर्तनशील रजिस्टर का काम कराती है। इसको  इलेक्ट्रॉनिक्स में बहुत सारे स्थानों पर प्रयोग किया जाता है। इसमें ज्यादातर दो पिने होती है जिनको सप्लाई से पैरलल  में लगाया जाता है जैसे जैसे हम वोल्टेज को सर्किट में बढ़ाते है वैसे ही इसका प्रतिरोध rasistance  कम  होता जाता है इसका प्रयोग अधिकतर ac  विद्युत्धारा वाले सर्किट में प्रयोग किया जाता है ।
यह एक सुरक्षा उपकरण के तौर पर इस्तेमाल करते है ।इसको  ज्यादातर एसएमपीएस smps या पॉवेरसप्लाई 
इत्यादि में प्राइमरी भाग में फ्यूज या फ्यूज रजिस्टर के बाद प्रयोग करते है।जैसे ही इसमें हम दिए जाने वाले वोल्टेज से ज्यादा वोल्टेज इसपर आता है तो इसका प्रतिरोध घट जाता है जिसके कारण  सर्किट में सॉर्ट सर्किट हो जाता है जिसके कारण इसके पहले लगा हुआ फ्यूज और वेरिस्टर दोनों ख़राब हो जाते है  जिससे हमारी हाई वोल्टेज की सप्लाई हमारे सर्किट में नहीं जाती है जिससे हमारा आगे का भाग ख़राब नहीं होता है ।इसको mov  के नाम से भी जाना जाता है । इसका प्रयोग सर्किट में फिल्ट्रेशन के काम के लिए भी प्रयोग किया जाता है । यह मार्केट मे अलग अलग मान के आते है।जैसे- 5D,10D,15D इत्यादी।

Thursday, December 23, 2021

what is Microcontroler ? माइक्रोकन्ट्रोलर क्या है?

what is Microcontroler ? माइक्रोकन्ट्रोलर क्या है?

हेलो दोस्तों , आज के सेशन में हम जानेंगे  माइक्रोकंट्रोलर क्या होता है ।
माइक्रो कंट्रोलर एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसका प्रयोग लगभाज आज के युग में हर स्थानों पर किया जाता है । microcontroler  4 से लगभग 64 या उससे ज्यादा पिनो के साथ आते है। ऐसे हम एक कंप्यूटर भी कह सकते है क्योकि इससे इनपुट ,आउटपुट , cpu , सबकुछ इसके अंदर ही होता है । इसमें यह किसी भी मशीन में मस्तिष्क का काम करता है सारे मशीनों को इसी के द्वारा कंट्रोल किया जाता है।esako प्रयोग करने के लिए सबसे पहले इसमें प्रोगरामिंग फीड किया जाता है। इसकी microcontroler  एसेम्बली लैंग्वेज़ को हे केवल समझता है । इसकी प्रोगरामिंग को आसान बनाने के लिए कम्पाइलर compiler  का प्रयोग करते है जिससे प्रोगरामिंग थोड़ी आसान हो जाती है । कम्पाइलर compiler हमारे compiler  की भाषा को एसेम्बली भाषा में परिवर्तित कराती है ।  माइक्रो कंट्रोलर को प्रोग्राम करने के लिए हमें एसेम्बली लैंग्वेज़  अथवा c या c++   प्रोगरामिंग लैंग्वेज़  का ज्ञान होना आवश्यक है  बिना इन सब के प्रोगरामिंग नहीं हो सकती है। और बिना प्रोग्राम किये हम ऐसे नहीं उसे कर सकते है । हम इसे अलग अलग मशीनों के लिए प्रोग्राम करके ऐसे उसे कर सकते है।

Microtek dead charger reparing (all voltege ok)

 नमस्कार दोस्तों, आज का यह वीडियो काफी महत्वपूर्ण है सभी ev टेक्निशियन के लिए, यह ब्लॉग माइक्रोटेक और ईस्टमैन दोनों कंपनियों पर लागू होगा इस...